Gujarat High Court Judgment: गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि नौकरी करने के दौरान हार्ट अटैक पड़ने से हुई मौत को स्वतः 'Employment Injury' नहीं मान सकते, जब तक यह प्रूफ ना हो जाए कि मौत का सीधा संबंध जॉब से था। हाईकोर्ट ने एक मैकेनिक के परिवार को दी गई Compensation की राशि को रद्द कर दिया। जस्टिस जे.सी. दोशी ने ESI Act की धारा 2(8) का हवाला देकर कहा कि 'Employment Injury' उसी को माना जाएगा, जो किसी दुर्घटना या व्यावसायिक बीमारी की वजह हो, जिसका कनेक्शन सीधे नौकरी के दौरान और उससे पैदा हुईं परिस्थितियों से हो।
मृतक के परिजन नहीं पेश कर पाए ठोस सबूत
लाइव लॉ डॉट इन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात हाईकोर्ट ने अहमदाबाद के मेडिकल अफसर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का जिक्र करते हुए, जिसमें मौत की वजह 'कोरोनरी हार्ट डिजीज की वजह से कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट' बताया गया था, कहा कि मृतक के परिजनों की तरफ से कोई ऐसा साक्ष्य पेश नहीं हुआ, जिससे यह प्रूफ हो सके कि मौत का कनेक्शन नौकरी से था। ना ही ये कोई व्यावसायिक बीमारी थी।
मृतक के परिवार ने दी थी ये दलील
मृतक के परिवार की तरफ से दलील दी गई थी कि मृतक को पहले से कोई भी बीमारी नहीं थी और जॉब के दौरान मेंटल व फिजिकल टेंशन की वजह से उसे Heart Attack पड़ा। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि यह प्रूफ करना जरूरी है कि नौकरी व मौत में स्पष्ट संबंध हो।
नजीर के तौर पर SC के इन फैसलों का किया जिक्र
गुजरात हाईकोर्ट ने इसमें सुप्रीम कोर्ट के दो निर्णयों का भी हवाला दिया। पहले, 'Mackinnon Mackenzie And Company Private Limited बनाम Ibrahim Mahmmed Issak (1969)” में कहा गया था कि दावा करने वालों पर यह जिम्मेदारी होती है कि वह यह प्रूफ करे कि हादसा या बीमारी जॉब से जुड़ी थी। वहीं, 'Shakuntala Chandrakant Shreshti बनाम Prabhakar Maruti Garvali (2007)' में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि दिल की बीमारी कभी-कभी लक्षण के बिना भी हो सकती है, इसलिए यह दिखाना जरूरी है कि जॉब ने मौत में योगदान दिया।
जानें मैकेनिक की मौत और मुआवजे का मामला
मामले के मुताबिक, मृतक एक कंपनी में फिटर मैकेनिक के तौर पर काम करता था। 6 सितंबर, 2004 को कंपनी में काम करते वक्त उसे सीने और पेट में दर्द हुआ था, जिसके बाद उसे हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक को उसकी मौत की वजह बताया गया।
मृतक के परिवार ने शुरुआत में ESI कॉरपोरेशन से Compensation की डिमांड की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। उन्होंने इसके बाद ESI अदालत में अपील दायर की, जहां मुआवजा दे दिया गया। इस निर्णय के खिलाफ ESI कॉरपोरेशन ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील की।
फिर गुजरात हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि केवल दिल का दौरा पड़ना 'Employment Injury' नहीं मान सकते, जब तक यह प्रूफ ना हो कि यह जॉब के कारण हुआ। चूंकि इस केस में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं था, इसलिए कोर्ट ने मुआवजा देने का ऑर्डर रद्द कर दिया।
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